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आरबीआई स्वैप योजना के तहत जमा का आधा हिस्सा पांच साल की अवधि का
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि रियायती स्वैप सुविधा के तहत जुटाई गई 127.2 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि का लगभग आधा हिस्सा पांच साल की अवधि के लिए है।
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भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा संचालित विदेशी मुद्रा गैर-निवासी खाते (एफसीएनआर-बी) की जमा राशि में विविधता आ गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, रियायती स्वैप योजना के अंतर्गत जुटाई गई कुल 127.2 अरब डॉलर की राशि में से लगभग 50 प्रतिशत जमा पांच साल की परिपक्वता अवधि के साथ हैं।
इस जमा संरचना से पता चलता है कि विदेशी निवेशकों और एनआरआई का एक बड़ा हिस्सा दीर्घकालीन निवेश में रुचि दिखा रहा है। पांच साल की अवधि वाली जमा राशि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थिर विदेशी मुद्रा प्रवाह सुनिश्चित करती है और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में मदद करती है।
आरबीआई की यह रियायती स्वैप सुविधा विदेशी मुद्रा में जमा आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन की गई थी। इस योजना के तहत जमा करने वाले भारतीय बैंकों को अधिक आकर्षक ब्याज दर प्रदान करने का लाभ मिलता है, जो विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करता है।
गवर्नर मल्होत्रा का यह बयान दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों का भारत के प्रति आत्मविश्वास बना हुआ है और वे भारतीय वित्तीय बाजार में दीर्घकालीन प्रतिबद्धता दिखाने को तैयार हैं। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को एक मजबूत और टिकाऊ आधार मिलता है।