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पराली जलाने की समस्या: हैप्पी सीडर्स क्यों नहीं बन सके समाधान

भारत में पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए हैप्पी सीडर्स जैसी तकनीकें विकसित की गई हैं, लेकिन ये किसानों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाई हैं। इस कारण हर साल सर्दियों में वायु प्रदूषण का संकट बना रहता है।

LSN India · 21 October 2026

पराली जलाने की समस्या: हैप्पी सीडर्स क्यों नहीं बन सके समाधान

भारत में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की परंपरा दशकों से चली आ रही है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और कृषि विशेषज्ञों ने हैप्पी सीडर्स जैसी नई तकनीकें विकसित की हैं, जो पराली को खेत में ही प्रबंधित करने में मदद करती हैं।

हैप्पी सीडर्स एक यांत्रिक उपकरण है जो पराली को काटता है और अगली फसल के बीज बोने में सहायता करता है। इस तकनीक से न केवल पराली जलाने की जरूरत खत्म होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। हालांकि, इस उपकरण की कीमत अधिक होने और किसानों तक सही प्रशिक्षण न पहुंचने के कारण इसका प्रचलन सीमित रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा सब्सिडी और जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद, किसानों के बीच परंपरागत तरीकों को छोड़ने की अनिच्छा और यंत्रों की सुलभता में कमी मुख्य बाधाएं बनी हुई हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में भूमि की खंडित स्थिति और छोटी जोत के कारण भी यह तकनीक व्यावहारिक साबित नहीं हुई है।

पराली जलाने से निकलने वाला धुआं सर्दियों में भारत के उत्तरी हिस्सों में गंभीर वायु प्रदूषण का कारण बनता है। इस समस्या को केवल तकनीकी समाधान से ही नहीं, बल्कि किसानों को वैकल्पिक आय के विकल्प प्रदान करके और उनके बीच जागरूकता फैलाकर ही हल किया जा सकता है।