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1966 के एशियाड सोने की यादें: हरबिंदर सिंह का संगीत से जुड़ा सफर
बैंकॉक में 1966 के एशियन गेम्स में भारत की ऐतिहासिक हॉकी जीत के छह दशक बाद भी दिग्गज खिलाड़ी हरबिंदर सिंह को वह गीत सुनते ही रोमांच हो जाता है जो टीम को स्वर्ण पदक तक ले गया था।
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83 वर्षीय तीन बार के ओलिंपिक पदक विजेता हरबिंदर सिंह ने बताया कि कैसे गीत 'वतन की राह में वतन के नौजवान शहीद हो' भारतीय टीम का साथी बना। उन्होंने कहा कि जब भी टीम किसी मैच के लिए जाती थी तो गोलकीपर शंकर लक्ष्मण इस गीत को टीम बस में बजाते थे और सभी खिलाड़ी गीत गाते थे। यह गीत स्वाभाविक रूप से पूरी टीम को प्रेरित करता था।
हरबिंदर ने कहा कि आज भी जब वह यह गीत सुनते हैं तो उन्हें रोमांच हो आता है। इसी गीत की प्रेरणा से भारतीय टीम एशियन गेम्स के फाइनल में पाकिस्तान को हराने में सफल हुई थी। यह जीत भारत के लिए एशियाड में पहला स्वर्ण पदक साबित हुई थी।
दिग्गज सेंटर फॉरवर्ड हरबिंदर सिंह ने बताया कि भारत ने मात्र दो साल पहले 1964 के टोक्यो ओलंपिक्स में भी स्वर्ण पदक जीता था। उसी संजीवनी शक्ति ने 1966 के एशियाड में भी भारतीय हॉकी टीम को बुलंदियों तक पहुंचाया था और वह गीत तथा पाकिस्तान के विरुद्ध फाइनल उनकी यादों में सदैव सजीव रहेगा।