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कुश्ती में सोने का तमगा: दुर्भाग्य से जूझ रहे अमन ने एशियन गेम्स पर किया कब्जा

हरियाणा के झज्जर से आए अमन सहरावत ने एशियन गेम्स में पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में स्वर्ण पदक अर्जित किया। बचपन में माता-पिता को खो चुके सहरावत ने ग्रामीण अखाड़े से शुरू कर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचने का दुर्लभ सफर तय किया है।

LSN India · 3 October 2026

कुश्ती में सोने का तमगा: दुर्भाग्य से जूझ रहे अमन ने एशियन गेम्स पर किया कब्जा

अमन सहरावत की विजयी कुश्ती ने एशियन गेम्स के स्टेडियम में इतिहास रचा है। पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती का फाइनल मुकाबला उन्होंने उत्तर कोरिया के विश्व चैंपियन चोंग सोंग हान को 11-7 के अंतर से हराकर सोने का तमगा अपने नाम किया।

हरियाणा के झज्जर जिले से ताल्लुक रखने वाले सहरावत के जीवन की यह जीत केवल खेल का एक परिणाम नहीं है, बल्कि कठिन परिस्थितियों पर किए गए विजय की कथा है। महज 10 साल की उम्र में उन्हें अपनी मां को खोना पड़ा। इसके मात्र एक साल बाद पिता की भी मृत्यु हो गई। दोनों माता-पिता की असमय मृत्यु के बाद भी सहरावत ने हार न मानते हुए कुश्ती को अपना रास्ता बनाया।

मिट्टी के अखाड़े में शुरुआत करने वाले इस पहलवान ने वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण के बाद विश्व स्तरीय खिलाड़ी का रूप ग्रहण किया है। एशियन गेम्स में उनकी यह जीत उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने सपनों को पंख लगाना चाहते हैं।