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खाद्य चेतावनी लेबल योजना को लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की अदालत में याचिका

लाल चेतावनी लेबल लगाने के प्रस्ताव से सौ अरब डॉलर का पैकेज्ड खाद्य उद्योग अचंभित रह गया है, लेकिन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह योजना बहुत नरम है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी चिंताएं न्यायालय में उठा रहे हैं।

LSN India · 7 September 2026

खाद्य चेतावनी लेबल योजना को लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की अदालत में याचिका

भारत में खाद्य सुरक्षा और पोषण को लेकर एक नई बहस शुरू हुई है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का एक वर्ग अदालत में अपनी चिंताएं दर्ज करा रहा है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित लाल चेतावनी लेबल प्रणाली अपर्याप्त है और उपभोक्ताओं को पर्याप्त संरक्षण नहीं देती है।

यह प्रस्ताव अस्वास्थ्यकर खाद्य उत्पादों की पहचान करने के लिए स्पष्ट दृश्य चेतावनी देने का प्रयास है। देश के पैकेज्ड खाद्य उद्योग, जिसका मूल्य लगभग सौ अरब डॉलर है, इस योजना का विरोध करता रहा है। हालांकि, अब तक के प्रस्ताव से उद्योग को कुछ राहत मिलने के संकेत हैं, जिससे वह आंशिक रूप से सहमत दिख रहा है।

स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का तर्क है कि प्रस्तावित उपाय पर्याप्त कड़े नहीं हैं। उन्हें आशंका है कि कमजोर नियम उच्च चीनी, नमक और तेल वाले उत्पादों की खपत में कोई महत्वपूर्ण कमी नहीं ला सकते। उनके अनुसार, भारत में बढ़ते मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से लड़ने के लिए अधिक प्रभावी और सख्त उपाय आवश्यक हैं।

इस विवाद से साफ है कि खाद्य सुरक्षा, व्यावसायिक हित और जनस्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती है। अदालत के निर्णय से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर स्पष्टता आने की उम्मीद है।