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भारत के निजी ऋण बाजार में स्वास्थ्यसेवा दूसरे स्थान पर, 13% हिस्सेदारी
भारत का निजी ऋण बाजार पहली छमाही 2026 में तेजी से विकसित हो रहा है, जहां 102 सौदे 3.5 अरब डॉलर के मूल्य पर पूरे हुए। घरेलू निवेश कोषों की अगुवाई में स्वास्थ्यसेवा क्षेत्र अब दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है।
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भारत की निजी ऋण बाजार पहली छमाही 2026 में एक महत्वपूर्ण विकास चरण में प्रवेश कर गया है। यह अवधि न केवल लेनदेन की संख्या में वृद्धि दिखाती है बल्कि निवेश के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय बदलाव का संकेत देती है।
इस अवधि में कुल 102 सौदों का क्रियान्वयन हुआ, जिनका कुल मूल्य 3.5 अरब डॉलर आंका गया। घरेलू निवेश कोष इस बाजार में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं और बाजार के विकास को गति दे रहे हैं।
स्वास्थ्यसेवा क्षेत्र निजी ऋण बाजार में अब द्वितीय स्थान पर पहुंच गया है, जिसका बाजार शेयर 13 प्रतिशत तक पहुंचा है। यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बढ़ते निवेश के रुझान को दर्शाता है।
यह विकास दर्शाता है कि निजी पूंजी भारत की बढ़ती स्वास्थ्यसेवा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में इस प्रवृत्ति के और मजबूत होने की संभावना है, क्योंकि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निवेश के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।