World · India Bureau
व्यवस्था पर संदेह लोकतंत्र की प्रगति का संकेत: पूर्व उच्च न्यायालय प्रमुख
पूर्व उड़ीसा उच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने कहा कि सरकारी व्यवस्था में संदेह प्रकट करना लोकतांत्रिक प्रगति का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश को उन राष्ट्रों की श्रेणी में नहीं आना चाहिए जहां बच्चे भूख और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में मारे जाते हैं।
LSN India ·

पूर्व उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण को लोकतांत्रिक परिपक्वता का प्रमाण बताया है। उनके अनुसार, किसी भी सरकारी तंत्र में संदेह और प्रश्न उठाना न केवल नागरिकों का अधिकार है, बल्कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
न्यायाधीश मुरलीधर ने भारत की सामाजिक स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि देश को एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए जहां बच्चों को भूख से या चिकित्सा सुविधाओं की कमी से मृत्यु न झेलनी पड़े। उन्होंने कहा कि किसी भी विकसित या विकासशील राष्ट्र को यह स्वीकार नहीं करना चाहिए कि उसके यहां बच्चे कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता के कारण जीवन खो रहे हैं।
पूर्व न्यायिक अधिकारी का यह वक्तव्य भारतीय समाज की मूल चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। वे मानते हैं कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र को मजबूत करती है। उनके विचार से, नागरिकों का सचेत और आलोचनात्मक दृष्टिकोण राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।