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जलवायु परिवर्तन से गर्मी से मौतें 36% बढ़ीं, भारत भी प्रभावित
पेरिस समझौते के बाद से दुनिया भर में तापमान से जुड़ी मौतों में तेजी से वृद्धि हुई है। भारत में लोग प्रतिवर्ष 2,600 घंटे से अधिक गंभीर गर्मी के जोखिम के संपर्क में आ रहे हैं।
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जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में गर्मी से होने वाली मौतों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। 2015 में पेरिस जलवायु समझौते के बाद से यह संख्या 36 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जो वैश्विक तापमान वृद्धि के गंभीर परिणामों को दर्शाता है।
भारत इस संकट से विशेष रूप से प्रभावित हो रहा है। देश के नागरिक प्रतिवर्ष 2,600 घंटे से अधिक ऐसी परिस्थितियों में रहते हैं जहां बाहरी शारीरिक गतिविधियों के दौरान मध्यम या उच्च स्तर का गर्मी तनाव जोखिम बना रहता है। यह अवधि एक साधारण मानव सहन क्षमता से कहीं अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति श्रमिकों, किसानों और बाहरी काम में लगे लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है। लंबे समय तक तीव्र गर्मी के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य समस्याएं, उत्पादकता में कमी और आर्थिक नुकसान हो रहा है।
इस बढ़ते संकट का समाधान करने के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने की तत्काल आवश्यकता है। भारत सहित विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल नीतियां अपनानी होंगी और अपनी आबादी को इस बढ़ते खतरे से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।