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कद बढ़ाने की सर्जरी: लाभ और जोखिम का संतुलन

शारीरिक कद में वृद्धि के लिए सर्जरी कराने की प्रवृत्ति भारत में तेजी से बढ़ रही है। चिकित्सा विशेषज्ञ इस प्रक्रिया से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

LSN India · 4 November 2026

कद बढ़ाने की सर्जरी: लाभ और जोखिम का संतुलन

कद में इजाफे के लिए अस्थि-विस्तार सर्जरी (लिम्ब लेंदनिंग सर्जरी) कराने वाले रोगियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। यह शल्य चिकित्सा प्रक्रिया हड्डियों को धीरे-धीरे खींचकर उन्हें लंबा करती है, जिससे समग्र कद में वृद्धि होती है।

चिकित्सा पेशेवर इस प्रक्रिया से जुड़े कई गंभीर जोखिमों की ओर ध्यान आकृष्ट कर रहे हैं। इनमें जोड़ों में अकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव और अत्यधिक तनाव, तंत्रिका संबंधी समस्याएं, और हड्डी के सही तरीके से जुड़ने में विलंब शामिल हैं। संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।

चिकित्सकों के अनुसार, यह सर्जरी तकनीकी दृष्टि से सुरक्षित हो सकती है, लेकिन इसके सफल परिणाम के लिए रोगी की आयु, समग्र स्वास्थ्य स्थिति, और सर्जन की दक्षता महत्वपूर्ण होती है। पुनर्वास और फिजियोथेरेपी प्रक्रिया लंबी और कठिन होती है।

विशेषज्ञ इस प्रक्रिया से पहले विस्तृत चिकित्सीय परामर्श लेने का आग्रह करते हैं। सभी संभावित जटिलताओं, सफलता की दर, और दीर्घकालिक परिणामों को समझना आवश्यक है। रोगियों को किसी अनुभवी और प्रमाणित हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।