LSN News › India

Technology · India Bureau

त्योहारी खरीदारी में नो-कॉस्ट ईएमआई: जानें छिपी हुई लागतें

त्योहारी मौसम में नो-कॉस्ट ईएमआई स्कीम ग्राहकों को स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीद आसान बनाती हैं, लेकिन प्रोसेसिंग फीस और विलंब शुल्क कुल खर्च को बढ़ा सकते हैं।

LSN India · 13 October 2026

त्योहारों के दौरान महंगी खरीदारी को आकर्षक बनाने के लिए नो-कॉस्ट ईएमआई योजनाएं बाजार में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। स्मार्टफोन, घरेलू उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदारों को इन स्कीमों के माध्यम से अपनी खरीद को किश्तों में विभाजित करने की सुविधा मिलती है। हालांकि, इन सुविधाजनक भुगतान विकल्पों के साथ कई छिपी हुई लागतें जुड़ी हो सकती हैं।

नो-कॉस्ट ईएमआई का मुख्य आकर्षण यह है कि कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं लगता। हालांकि, विभिन्न बैंक और वित्तीय संस्थान प्रोसेसिंग फीस लगाते हैं, जो कुल बिल को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकती है। इसके अलावा, किश्त भुगतान में देरी होने पर दंड राशि भी जुड़ जाती है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि ग्राहकों को कोई भी नो-कॉस्ट ईएमआई स्कीम चुनने से पहले सभी शर्तों को सावधानीपूर्वक पढ़ना चाहिए। प्रोसेसिंग शुल्क, किसी भी अतिरिक्त प्रभार और पेनल्टी नीति को समझना महत्वपूर्ण है। इससे वास्तविक खर्च की स्पष्ट तस्वीर मिलती है और त्योहारी मौसम में सुरक्षित खरीदारी सुनिश्चित होती है।