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तिब्बती पठार भारतीय वायु सेना के लिए लाभकारी: एयर चीफ सिंह
भारतीय वायु सेना प्रमुख ए पी सिंह का कहना है कि चीनी पीएलए वायु सेना ऊंचाई वाले हवाई अड्डों से संचालन में बाधा का सामना करती है। भारत के निचले स्तर के हवाई अड्डे, पूर्ण पेलोड क्षमता और तीव्र प्रतिक्रिया समय में बेहतरी रखते हैं।
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भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने कहा है कि तिब्बती पठार की भौगोलिक परिस्थितियां चीनी वायु सेना के संचालन में महत्वपूर्ण बाधा उत्पन्न करती हैं। उच्च ऊंचाई वाले हवाई अड्डों पर संचालन से विमानों की पेलोड वहन क्षमता में कमी आती है और यांत्रिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
एयर चीफ सिंह के अनुसार, भारतीय वायु सेना को इस मामले में रणनीतिक लाभ प्राप्त है। भारतीय हवाई अड्डे अपेक्षाकृत निचली ऊंचाई पर स्थित हैं, जिससे विमान अपनी पूरी क्षमता के साथ उड़ान भर सकते हैं।
इसके अलावा, भारतीय वायु सेना को अपनी तैनातियों और प्रतिक्रिया समय में भी महत्वपूर्ण सुविधा है। निचले स्तर के ठिकानों से संचालित विमान तीव्र गति से लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं और अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
एयर चीफ का यह आकलन क्षेत्रीय वायु शक्ति संतुलन और भारत की रक्षा तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भूभाग संबंधी इस प्राकृतिक लाभ को भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता में एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।