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गुंडा एक्ट का दुरुपयोग: इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी आलोचना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गुंडा एक्ट का उपयोग परेशानी के साधन के रूप में करने का आरोप लगाया है। अदालत ने गोंडा जिले के एक व्यक्ति को गुंडा घोषित करने वाले आदेश को रद्द कर दिया।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुंडा एक्ट के दुरुपयोग पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश प्रशासन की कड़ी आलोचना की है। अदालत का मानना है कि राज्य सरकार इस कानून को नागरिकों को परेशान करने और सताने का एक साधन बना रही है।
यह टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने गोंडा जिले के जिलाधीश के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें जहीद अली को गुंडा घोषित करके छह महीने के लिए जिले से बाहर निकाल दिया गया था। अदालत का निर्णय गुंडा एक्ट के प्रावधानों के दुरुपयोग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी उस बड़ी चिंता को रेखांकित करती है जो गुंडा एक्ट जैसे व्यापक कानूनों के दुरुपयोग के संबंध में विभिन्न न्यायिक मंचों पर उठाई जाती रही है। ऐसे कानूनों के तहत दिए गए आदेशों की समीक्षा के लिए अदालते लगातार अधिक सतर्कता बरतने का आह्वान कर रही हैं।
यह फैसला राज्य प्रशासन को अलर्ट करता है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। अदालत का रुख इस बात की ओर इशारा करता है कि आगामी समय में ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी जारी रहेगी।