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लैंगिक पहचान और यौन अभिविन्यास आधारित उत्पीड़न रोकें: उच्च न्यायालय
उच्च न्यायालय ने स्कूलों को性 पहचान और यौन अभिविन्यास के आधार पर बुलिंग को रोकने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। यह आदेश फरीदाबाद के एक प्रमुख स्कूल में पढ़ने वाले 16 वर्षीय छात्र की मृत्यु के मामले में सुनवाई के दौरान दिया गया है।
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उच्च न्यायालय ने शिक्षा संस्थानों को लैंगिक पहचान और यौन अभिविन्यास के आधार पर उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने और उन पर कार्रवाई करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। न्यायालय का यह आदेश फरीदाबाद स्थित एक प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने वाले एक 16 वर्षीय किशोर के 24 फरवरी 2022 को हुई मृत्यु से संबंधित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है।
मृतक छात्र की माता ने न्यायालय में याचिका दाखिल की थी, जिसमें स्कूल प्रशासन और प्रधानाध्यापिका के विरुद्ध आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ता ने स्कूल में उत्पीड़न की घटनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया था। उच्च न्यायालय की यह कार्रवाई लैंगिक विविधता से संबंधित गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है।
न्यायालय के निर्देशों में स्कूलों से अपेक्षा की गई है कि वे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े नीतियां बनाएं और लागू करें। न्यायालय ने जोर दिया है कि शिक्षा संस्थानों को सभी प्रकार के भेदभाव और उत्पीड़न को रोकने के लिए जवाबदेही तंत्र स्थापित करना चाहिए।
यह निर्णय स्कूलों में समावेशी वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश से शिक्षा संस्थानों में संवेदनशीलता और सुरक्षात्मक उपायों में वृद्धि होगी, जिससे सभी छात्रों को समान और सुरक्षित शिक्षा वातावरण मिल सकेगा।