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अमेडिया भूमि घोटाले में HC का सवाल: मुख्य हिस्सेदार को क्यों बरी रखा
अमेडिया भूमि घोटाले की जांच में उच्च न्यायालय ने तीव्र आपत्ति जताई है। न्यायमूर्ति माधव जामदार की बेंच ने पूछा है कि 99 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले व्यक्ति को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।
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अमेडिया भूमि घोटाले की जांच प्रक्रिया में उच्च न्यायालय ने गंभीर असंगति को लेकर चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति माधव जामदार की बेंच ने जांच अधिकारी के हलफनामे की समीक्षा करते हुए पाया कि जहां 99 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले व्यक्ति को आरोपी सूची से बाहर रखा गया है, वहीं महज 1 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले व्यक्ति को दोषी माना गया है।
न्यायालय ने जांच एजेंसी से पूछा है कि इस तरह की विसंगति कैसे संभव है। उच्च न्यायालय की ओर से जारी अवलोकन से लगता है कि जांच में अतार्किक आधार पर लोगों को आरोपी बनाया या बरी किया गया है।
इस मामले में न्यायालय ने आगे की कार्यवाही से पहले जांच अधिकारी को स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जामदार की बेंच ने कहा कि जांच की पारदर्शिता और तार्किकता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
अमेडिया भूमि घोटाले को लेकर उच्च न्यायालय की कड़ी प्रतिक्रिया जांच प्रक्रिया में विश्वसनीयता के सवालों को उजागर करती है। माना जा रहा है कि न्यायालय के इस कदम से जांच में निष्पक्षता आने की उम्मीद है।