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उच्च क्रेडिट-डिपोजिट अनुपात से फंडिंग संकट का संकेत नहीं: आरबीआई
भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऋण स्वयं जमा राशि का सृजन करते हैं। सीडी अनुपात का मूल्यांकन तरलता, पूंजी और अन्य सतर्कता संकेतकों के साथ किया जाना चाहिए।
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भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि बैंकिंग क्षेत्र में उच्च क्रेडिट-डिपोजिट (सीडी) अनुपात स्वयं में फंडिंग की कमजोरी या संकट का संकेत नहीं देता है। आरबीआई की ताजा रिपोर्ट में यह महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया गया है जो बैंकिंग प्रणाली के स्वास्थ्य को लेकर चिंताओं को दूर करने का प्रयास है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों द्वारा दिए गए ऋण स्वयं जमा राशि का निर्माण करते हैं। जब कोई बैंक किसी व्यक्ति या संस्था को ऋण देता है, तो वह राशि आमतौर पर बैंकिंग प्रणाली के भीतर ही जमा बन जाती है, जिससे कुल जमा में वृद्धि होती है। इस मौलिक आर्थिक संबंध को समझे बिना सीडी अनुपात की व्याख्या करना गलत हो सकता है।
केंद्रीय बैंक ने जोर दिया है कि सीडी अनुपात का मूल्यांकन एक अलग-थलग संकेतक के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक संदर्भ में किया जाना चाहिए। बैंकिंग प्रणाली की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए तरलता की स्थिति, पूंजी पर्याप्तता अनुपात, गुणवत्ता संकेतक और अन्य सतर्कता मानदंडों पर समवर्ती रूप से विचार किया जाना आवश्यक है।
आरबीआई की यह रिपोर्ट उन शिक्षाविदों और विश्लेषकों को संबोधित करती है जो सीडी अनुपात के आधार पर बैंकों की फंडिंग में कमजोरी का आकलन करते हैं। रिजर्व बैंक के इस स्पष्टीकरण से वर्तमान बैंकिंग व्यवस्था की बेहतर समझ सामने आएगी और अनावश्यक चिंताएं दूर होंगी।