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तेल की कीमतों से OMCs को रोज ₹530 करोड़ का नुकसान
सितंबर में पेट्रोल पर ₹8 प्रति लीटर और डीजल पर ₹9 प्रति लीटर का घाटा दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण तेल विपणन कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है।
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तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण प्रतिदिन ₹530 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं। इक्रा (Icra) की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर महीने में पेट्रोल पर ₹8 प्रति लीटर और डीजल पर ₹9 प्रति लीटर का अंडररिकवरी दर्ज किया गया। यह अंडररिकवरी तब होता है जब खुदरा कीमत कंपनियों की कीमत से कम रह जाती है।
तेल कंपनियां सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर ईंधन बेचने के लिए बाध्य होती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार दरों से अलग हो सकती हैं। जब कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो OMCs को अपनी खरीद लागत और बिक्रय कीमत के बीच का अंतर वहन करना पड़ता है। इस स्थिति से तेल क्षेत्र में भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
इस तरह के अंडररिकवरी की स्थिति तेल विपणन कंपनियों की लाभप्रदता और उनकी वित्तीय स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। ऐसे समय में सरकार और नीति निर्माताओं के सामने ईंधन कीमतों में संतुलन बनाए रखने की चुनौती बड़ी होती है। अर्थव्यवस्था में उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता और उद्योग की स्थिरता दोनों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।