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जनसांख्यिकी पैनल के प्रश्नावली को लेकर उठे सवाल, व्यापक डेटा मांग विवादास्पद
सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नायलकर की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति के प्रश्नावली को लेकर चिंताएं उठी हैं। गृह मंत्रालय ने मई में इस समिति को अवैध आप्रवास से जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने का कार्य दिया था।
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गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई को गठित उच्च स्तरीय जनसांख्यिकी परिवर्तन समिति के प्रश्नावली को लेकर व्यापक चिंताएं सामने आई हैं। सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नायलकर की अध्यक्षता में गठित इस समिति को अवैध आप्रवास और अन्य 'असामान्य' कारणों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने का दायित्व दिया गया है।
समिति द्वारा जारी प्रश्नावली में बड़े पैमाने पर डेटा संग्रहण की मांग की गई है, जिससे इसके उद्देश्य और पद्धति को लेकर सवाल उठे हैं। समिति के निर्देश पत्र में जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए उपयुक्त संस्थागत तंत्र की सिफारिश करने का भी उल्लेख है।
इस समिति को जनसंख्या वृद्धि से संबंधित मुद्दों की जांच करने और सरकार को उपचारात्मक उपायों की सिफारिश करने का दायित्व सौंपा गया है। हालांकि, प्रश्नावली की व्यापकता और इसके द्वारा मांगी जाने वाली सूचनाओं की प्रकृति विभिन्न पक्षों के बीच बहस का विषय बन गई है।
समिति की कार्यावधि और इसके निष्कर्षों के संभावित प्रभाव को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जनसांख्यिकीय अध्ययनों में पारदर्शिता और सावधानीपूर्वक पद्धति अत्यंत महत्वपूर्ण है।