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हिंदी में एमबीएस कोर्स विफल; छात्र बेहतर भविष्य के लिए अंग्रेजी की ओर लौट रहे हैं
संसदीय समिति की सिफारिश पर शुरू किया गया हिंदी माध्यम का चिकित्सा कोर्स अपेक्षित सफलता नहीं पा सका है। छात्र अपने करियर की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए अंग्रेजी माध्यम की ओर रुख कर रहे हैं।
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एक प्रमुख संसदीय समिति की सिफारिश के आधार पर शुरू किया गया हिंदी माध्यम में एमबीएस शिक्षा का प्रयोग अपने लक्ष्य से भटक गया है। उच्च शिक्षा में हिंदी को बढ़ावा देने की इस पहल को लेकर शुरुआती उत्साह के बावजूद, छात्र अब अंग्रेजी माध्यम के कोर्स में स्थानांतरित हो रहे हैं।
छात्रों का यह रुझान मुख्य रूप से उनके व्यावसायिक भविष्य से जुड़ी चिंताओं से प्रेरित है। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल परीक्षाओं, अनुसंधान के अवसरों और विदेशों में पेशेवर अभ्यास के लिए अंग्रेजी की महारत अपरिहार्य मानी जाती है। इसके अलावा, चिकित्सा विज्ञान का अधिकांश वर्तमान साहित्य और संसाधन अंग्रेजी में उपलब्ध हैं।
शिक्षा जगत के विशेषज्ञ इस स्थिति को भाषा और व्यावहारिकता के बीच संतुलन खोजने की जटिलता का प्रतीक मानते हैं। हिंदी में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने का उद्देश्य महत्वपूर्ण हो सकता है, किंतु इसे रोजगार की संभावनाओं और वैश्विक मानकों के साथ तालमेल बिठाना आवश्यक है।
इस असफलता ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में भाषा नीति के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता को रेखांकित किया है, विशेषकर ऐसे विषयों में जहां वैश्विक मानकों और अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।