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राजमार्गों पर हिंदी का उपयोग किसी थोपे जाने वाली चीज़ के रूप में नहीं देखा जा सकता: कांग्रेस सांसद
एक कांग्रेस सांसद ने कहा है कि राजमार्गों पर संकेत पट्टियों में हिंदी का उपयोग करना किसी भाषा को किसी पर थोपने जैसा नहीं माना जा सकता। सांसद का तर्क है कि यह सार्वजनिक सूचना के लिए एक वैध प्रशासनिक निर्णय है।
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कांग्रेस पार्टी के एक सांसद ने राज्यों के राजमार्गों पर हिंदी भाषा के संकेत पट्टियों के उपयोग को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों का जवाब देते हुए कहा है कि यह किसी भाषा को जबरदस्ती थोपना नहीं है। सांसद के अनुसार, सड़कों पर सूचना प्रदान करने के लिए हिंदी का उपयोग करना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है जो राष्ट्रीय हित में किया जा रहा है।
सांसद ने जोर देते हुए कहा कि राजमार्गों पर लगने वाले संकेत पट्टियों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को आवश्यक जानकारी प्रदान करना है। इन संकेतों में हिंदी का समावेश सार्वजनिक सुरक्षा और सूचना के लिए एक व्यावहारिक कदम है, न कि किसी भाषा को अन्य भाषाओं से ऊपर रखने का प्रयास।
कांग्रेस सांसद ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि बहुभाषिक भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न भाषाओं को स्थानीय सूचना के साथ प्रदर्शित किया जा सकता है। उनके विचार में, हिंदी को राष्ट्रीय स्तर पर सड़क संकेतों में शामिल करना भारत की संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप है।
यह विवाद तब सामने आया जब कई राज्यों के राजमार्गों पर हिंदी भाषा के संकेत पट्टियों की वजह से भाषाई मुद्दों को लेकर बहस छिड़ गई थी। सांसद का बयान इस चल रहे विवाद में केंद्रीय सरकार के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है।