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हिंदू विवाह कानून के तहत धार्मिक रीति-रिवाज पर्याप्त नहीं: उच्च न्यायालय
एक स्वीडिश महिला ने विवाह पंजीकरण के लिए भारतीय नागरिकता और स्थायी निवास की आवश्यकता वाले दिशानिर्देशों को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने माना कि विवाह की वैधता केवल धार्मिक अनुष्ठानों से सिद्ध नहीं होती।
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एक उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण के लिए केवल धार्मिक रीति-रिवाज का पालन करना पर्याप्त नहीं है। न्यायालय के इस निर्णय से विवाह पंजीकरण से जुड़े मौजूदा दिशानिर्देशों पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े हुए हैं।
एक स्वीडिश महिला द्वारा दायर याचिका में यह मुद्दा उठाया गया था जिसमें विवाह पंजीकरण के लिए कम से कम एक पक्ष को भारतीय नागरिक और स्थायी निवासी होना आवश्यक है, ऐसे दिशानिर्देशों को चुनौती दी गई थी। महिला का तर्क था कि ये शर्तें अनावश्यक रूप से प्रतिबंधात्मक हैं और विभिन्न धार्मिक समुदायों के सदस्यों के विवाह के अधिकार को प्रभावित करती हैं।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि विवाह की वैधता और पंजीकरण की प्रक्रिया दो अलग-अलग मामले हैं। न्यायालय के अनुसार, हिंदू परंपरा के अनुसार विवाह संपन्न करना और कानूनी रूप से उसे पंजीकृत करवाना एक दूसरे से अलग हैं।
यह निर्णय विदेशी नागरिकों और भारतीय नागरिकों के बीच होने वाले विवाहों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं में स्पष्टता लाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अंतर्राष्ट्रीय विवाहों के पंजीकरण से जुड़ी अन्य याचिकाओं को भी प्रभावित कर सकता है।