LSN News › India

World · India Bureau

पितृपक्ष में बाल कटवाना क्यों माना जाता है वर्जित, जानें धार्मिक मान्यताएं

हिंदू धर्म में पितृपक्ष काल को पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का समय माना जाता है। इस अवधि में बाल न कटवाने की परंपरा को लेकर शास्त्रों में विशेष विधान है।

LSN India · 3 October 2026

पितृपक्ष में बाल कटवाना क्यों माना जाता है वर्जित, जानें धार्मिक मान्यताएं

पितृपक्ष की परंपरा हिंदू धर्म में गहराई से जुड़ी है और इस अवधि में कई नियमों का पालन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष में बाल और नाखून कटवाना निषेध माना गया है। माना जाता है कि इस समय पूर्वज आत्माएं अपने वंशजों के पास आती हैं, इसलिए इस काल में शुद्धता और संयम बनाए रखने की आवश्यकता होती है।

धार्मिक ग्रंथों में पितृपक्ष को एक विशेष आध्यात्मिक काल के रूप में वर्णित किया गया है। इस अवधि में बाल और नाखून कटवाने से माना जाता है कि यह कार्य पितरों के प्रति अनुचित माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, शरीर के किसी भी अंग को काटना इस समय में अशुभ माना गया है।

पितृपक्ष प्रायः आश्विन महीने में सूर्य के कन्या राशि से तुला राशि में आने के दौरान मनाया जाता है। इस पंद्रह दिवसीय अवधि में लोग अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, पिंडदान और अन्य धार्मिक कार्य संपन्न करते हैं। परंपरा के अनुसार, इस समय आचरण, खान-पान और दैनिक क्रियाकलापों में सावधानी बरतनी चाहिए।

विभिन्न धार्मिक संप्रदाय इन नियमों को भिन्न-भिन्न तरीकों से व्याख्या करते हैं, लेकिन मूल भाव पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रदर्शित करना ही है। आधुनिक समय में भी भारत के कई क्षेत्रों में इन परंपराओं का पालन किया जाता है।