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कलावा बांधने के नियम: जानें किस हाथ में है धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कलावा बांधने की परंपरा है, लेकिन इसे किस हाथ में बांधना चाहिए, यह सवाल अक्सर उठता है। धार्मिक नियमों के अनुसार कलावा बांधने का सही तरीका जानिए।

LSN India · 2 November 2026

कलावा बांधने के नियम: जानें किस हाथ में है धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। इन अनुष्ठानों में कलावा या मौली बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि कलावा बांधने से व्यक्ति को शुभ फल मिलते हैं और बुरी शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा हमेशा दाहिने हाथ में बांधना चाहिए। दाहिना हाथ शुभता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। पूरब में किए जाने वाले अधिकांश धार्मिक कार्यों में दाहिने हाथ का प्रयोग करने की परंपरा है। मौली को दाहिने हाथ की कलाई पर बांधना सही नियम माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, बाएं हाथ को अशुद्ध माना जाता है, इसलिए उसमें कलावा नहीं बांधना चाहिए। दाहिने हाथ में मौली बांधने से आध्यात्मिक सुरक्षा मिलती है और पूजा-पाठ के दौरान यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही दाहिने हाथ में कलावा बांधने की सलाह दी जाती है।

कुछ विशेष परिस्थितियों में, यदि किसी को दाहिने हाथ में कलावा बांधने में कठिनाई हो, तो वह बाएं हाथ का प्रयोग कर सकता है, लेकिन सामान्य रूप से दाहिने हाथ में मौली बांधना ही सही माना जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, कलावा बांधते समय शुद्धता और सच्ची भावना का होना आवश्यक है।