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द्वितीया श्राद्ध आज: तर्पण के लिए कुतुप वेला का महत्व जानें
28 सितंबर को द्वितीया तिथि का श्राद्ध मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए कुतुप वेला सर्वोत्तम समय माना जाता है।
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पारंपरिक हिंदू मान्यताओं के अनुसार पितरों को समर्पित अनुष्ठानों के लिए कुतुप वेला को सबसे शुभ माना गया है। यह समय प्रायः दोपहर के आसपास आता है और इसी दौरान किए गए तर्पण और पिंडदान को विशेष महत्व दिया जाता है।
28 सितंबर की द्वितीया तिथि पर कुतुप काल दोपहर 11:48 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में श्राद्ध संबंधी कार्यों को पूरा करने से पितरों को तृप्ति मिलने का विश्वास है।
विभिन्न भारतीय शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण इस समय में कुछ अंतर हो सकता है। श्राद्ध करने वाले व्यक्तियों को अपने क्षेत्र विशेष में कुतुप वेला का सही समय जानकर ही अनुष्ठान संपन्न करने की सलाह दी जाती है।
शास्त्रों में बताया गया है कि इस निर्धारित समय में किए गए कार्य पितरों तक अधिक सीधे और प्रभावी ढंग से पहुंचते हैं। इसलिए धार्मिक दृष्टि से इस वेला का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।