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हिंदुत्व की व्याख्या औपनिवेशिक इतिहास दृष्टिकोण पर आधारित: थापर
प्रख्यात इतिहासकार रोमिला थापर का कहना है कि यदि भारतीय इतिहास की व्याख्या में शिलालेखों जैसे भौतिक साक्ष्यों पर अधिक ध्यान दिया गया होता तो स्थिति भिन्न हो सकती थी।
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इतिहास के क्षेत्र में दशकों के अनुभव वाली प्रख्यात विद्वान रोमिला थापर ने कहा है कि भारतीय इतिहास की वर्तमान हिंदुत्ववादी व्याख्या बड़े हिस्से में औपनिवेशिक काल की व्याख्याओं पर निर्मित है। थापर के अनुसार, यह दृष्टिकोण उस समय के यूरोपीय विद्वानों द्वारा स्थापित किए गए ढांचे को अनुसरण करता रहा है।
थापर ने जोर दिया कि भारतीय इतिहास को समझने के लिए शिलालेख, सिक्के और अन्य पुरातात्विक साक्ष्यों जैसे भौतिक साक्ष्यों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। उनके विचार में, यदि ऐतिहासिक अनुसंधान में इन ठोस साक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया होता तो भारतीय इतिहास की व्याख्या आज काफी भिन्न होती।
इस बात पर जोर देते हुए कि साक्ष्य-आधारित इतिहास लेखन ही अधिक विश्वसनीय है, थापर ने कहा कि वर्तमान समय में इतिहास को राजनीतिक उद्देश्यों के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ऐतिहासिक तथ्यों को समझने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण और वैज्ञानिक पद्धति का पालन करना आवश्यक है।