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1894 में सांपों के जहर से बनी पहली एंटीवेनम, चिकित्सा विज्ञान में क्रांति
दो वैज्ञानिकों ने सांपों के जहर का उपयोग करके पहली बार एंटीवेनम विकसित की थी। यह खोज जहरीले सांपों के काटने से होने वाली मौतों को रोकने में एक अहम मोड़ साबित हुई।
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चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर 1894 में स्थापित हुआ था, जब दो वैज्ञानिकों ने सांपों के विष का उपयोग करके पहली एंटीवेनम दवा का निर्माण किया। यह क्रांतिकारी खोज जहरीले सांपों के काटने से पीड़ितों के उपचार में एक नया द्वार खोल गई।
एंटीवेनम के विकास से पहले, सांप के जहर से काटे गए मरीजों की जीवन रक्षा करना चिकित्सकों के लिए अत्यंत कठिन कार्य था। इन वैज्ञानिकों की नवाचारी विधि में सांपों से जहर निकालकर उसे नियंत्रित तरीके से जानवरों को दिया जाता था, जिससे उनके शरीर में जहर के विरुद्ध एंटीबॉडीज विकसित होते थे। इन एंटीबॉडीज को अलग किया जाता था और मानव उपचार के लिए एंटीवेनम तैयार किया जाता था।
भारत सहित दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में जहां सांपों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं, एंटीवेनम का विकास सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। सांपों के काटने से होने वाली मौतों में भारी कमी आई और हजारों जीवन बचाए जा सके।
आज भी एंटीवेनम का उत्पादन उसी मूल सिद्धांत पर आधारित है जिसकी नींव 130 साल पहले रखी गई थी। यह उपचार दुनियाभर में जहरीले सांपों के काटने के मामलों में प्राथमिक चिकित्सा के रूप में प्रयोग होता है।