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1947 के बाद डिब्रूगढ़ से पहली अंतरराष्ट्रीय कार्गो नौका रवाना
असम के पूर्वी क्षेत्र में स्थित डिब्रूगढ़ बंदरगाह ने 76 सालों के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार का द्वार फिर से खोला है। देश की आजादी के बाद यह पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय कार्गो जहाज को विदा किया गया है।
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असम के डिब्रूगढ़ में स्थित ब्रह्मपुत्र नदी का ऐतिहासिक बंदरगाह एक बार फिर भारत के सबसे व्यस्त पोतश्रयणों में से एक बनने की ओर अग्रसर हुआ है। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद पहली बार एक अंतरराष्ट्रीय कार्गो पोत यहां से रवाना हुआ है, जो इस क्षेत्र के जलमार्ग व्यापार में नई जान डालने का संकेत है।
डिब्रूगढ़ बंदरगाह को भारत में जलमार्ग परिवहन के पुनरुद्धार की रणनीति का एक महत्वपूर्ण अंग माना जा रहा है। ब्रह्मपुत्र नदी के जरिए पूर्वोत्तर भारत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है।
इस बंदरगाह को पुनः सक्रिय करने के प्रयास क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गतिविधि प्रदान करेंगे और असम सहित पूर्वोत्तर राज्यों के लिए व्यापार के नए द्वार खोलेंगे। नदी मार्ग से माल ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम पड़ती है, जिससे स्थानीय व्यापारियों को लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिब्रूगढ़ बंदरगाह की पुनर्जीवन की यह पहल केवल माल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में यह बंदरगाह क्षेत्रीय रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।