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1859 के कैरिंगटन इवेंट पर तिरुवनंतपुरम वेधशाला के नए साक्ष्य

तिरुवनंतपुरम की वेधशाला के ऐतिहासिक अभिलेखों से पता चला है कि 1859 का कैरिंगटन इवेंट, इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूचुंबकीय तूफानों में से एक, कई हफ्तों तक सौर प्लाज्मा के उत्सर्जन की एक श्रृंखला से पहले और बाद में आया था। ये उत्सर्जन पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ परस्पर क्रिया करते थे।

LSN India · 20 September 2026

1859 के कैरिंगटन इवेंट पर तिरुवनंतपुरम वेधशाला के नए साक्ष्य

तिरुवनंतपुरम की वेधशाला के ऐतिहासिक रिकॉर्ड ने 1859 के कैरिंगटन इवेंट की समझ में नई गहराई जोड़ दी है। यह घटना इतिहास में दर्ज सबसे व्यापक भूचुंबकीय तूफानों में से एक मानी जाती है। नई खोज से पता चलता है कि इस प्रमुख घटना से पहले और बाद में सूर्य से प्लाज्मा के विस्फोटन की एक लंबी श्रृंखला हुई थी।

शोध में पाया गया कि ये सौर उत्सर्जन कई सप्ताह की अवधि में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ जटिल तरीके से परस्पर क्रिया करते रहे। भारतीय उपमहाद्वेश के इस क्षेत्र में बनाए गए विस्तृत अवलोकन नोट्स इस खगोलीय घटना की प्रगति को ट्रैक करने के लिए महत्वपूर्ण साबित हुए हैं।

कैरिंगटन इवेंट 1-2 सितंबर, 1859 को घटित हुई थी और विश्वव्यापी दूरसंचार प्रणालियों को प्रभावित किया था। इस नई शोध खोज से भविष्य में ऐसी भूचुंबकीय घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने और भविष्यवाणी करने में सहायता मिल सकती है। आधुनिक बिजली ग्रिड और संचार बुनियादी ढांचे के लिए ऐसे तूफानों की संभावना की समझ अत्यंत महत्वपूर्ण है।