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इतिहास लेखन राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं होना चाहिए: प्रो. थापर
प्रख्यात इतिहासकार प्रो. रोमिला थापर का मानना है कि भारतीय इतिहास की हिंदुत्ववादी व्याख्या एकल और निश्चित नहीं हो सकती। उनके अनुसार, ऐतिहासिक अनुसंधान समाज के विकास को समझाने के लिए होना चाहिए, समकालीन राजनीतिक उपयोग के लिए नहीं।
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प्रख्यात इतिहासकार प्रो. रोमिला थापर ने इस बात पर जोर दिया है कि इतिहास लेखन का उद्देश्य वर्तमान राजनीतिक जरूरतों को पूरा करना नहीं होना चाहिए। थापर के अनुसार, भारतीय इतिहास की कोई भी एकीकृत व्याख्या, विशेषकर हिंदुत्ववादी दृष्टिकोण, अपने आप में पूर्ण और अटल नहीं हो सकती।
थापर का तर्क है कि ऐतिहासिक शोध का प्राथमिक लक्ष्य भारतीय समाज के क्रमिक विकास और परिवर्तन को समझना होना चाहिए। उनका मानना है कि इतिहास की जांच-पड़ताल को तटस्थ और वैज्ञानिक होना चाहिए, जो विभिन्न स्रोतों और साक्ष्यों के विश्लेषण पर आधारित हो।
प्रख्यात विद्वान के विचारों से साफ है कि इतिहास को समकालीन राजनीतिक एजेंडे की सेवा में नहीं लगाया जा सकता। थापर के अनुसार, यह दृष्टिकोण ऐतिहासिक सत्य को विकृत करता है और अकादमिक स्वतंत्रता को खतरे में डालता है। वे मानती हैं कि इतिहासकारों को विविध साक्ष्य और बहुलवादी दृष्टिकोण के माध्यम से भारतीय अतीत की जटिल वास्तविकताओं को समझाने का प्रयास करना चाहिए।