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शौक बच्चों में नवाचारी सोच विकसित करते हैं: सेंचुरियन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति
सेंचुरियन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति का मानना है कि बचपन के शौक और रुचियां युवाओं में रचनात्मक और नवाचारी चिंतन को बढ़ावा देते हैं। उनके अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों की व्यक्तिगत रुचियों का पोषण करना उनके समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
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शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जाने जाने वाले सेंचुरियन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने हाल ही में बचपन के शौक के महत्व पर जोर दिया है। उनका मानना है कि जब बच्चे अपनी व्यक्तिगत रुचियों को विकसित करने का अवसर पाते हैं, तो वे अधिक रचनात्मक और नवाचारी सोच विकसित करते हैं।
कुलाधिपति के अनुसार, विविध क्षेत्रों में शौक विकसित करना बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। संगीत, कला, विज्ञान, खेल या अन्य कार्यक्षेत्रों में अपनी रुचि अनुसरण करते हुए, बच्चे समस्या समाधान की अपनी क्षमता को बढ़ाते हैं और नई संभावनाओं की खोज करते हैं।
उन्होंने शिक्षाविदों और अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को उनकी व्यक्तिगत रुचियों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करें। एक व्यापक शिक्षा प्रणाली में जहां केवल शैक्षणिक प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, बच्चों के लिए अपने शौक को विकसित करने के लिए स्थान और समय मिलना आवश्यक है।
कुलाधिपति का मत है कि शौक के माध्यम से विकसित कौशल बच्चों को भविष्य में विभिन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार करते हैं। यह दृष्टिकोण समग्र मानव विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।