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भारत रत्न न मिलने का दर्द: अशोक कुमार ने व्यक्त किया खेद
हॉकी के महान खिलाड़ी ध्यानचंद के पुत्र और पूर्व भारतीय कप्तान अशोक कुमार ने त्रिपुरा में अपने पिता की मूर्ति का अनावरण करते समय देश के सर्वोच्च सम्मान न मिलने पर अपना खेद जताया।
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त्रिपुरा सरकार द्वारा विशेष रूप से आमंत्रित किए गए अशोक कुमार ने हॉकी किंवदंती ध्यानचंद को भारत रत्न से सम्मानित न किए जाने पर चिंता व्यक्त की है। इस अवसर पर उनकी मूर्ति का विधिवत अनावरण किया गया, लेकिन अशोक कुमार का ध्यान देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की अनुपस्थिति की ओर गया।
ध्यानचंद का भारतीय हॉकी में योगदान असाधारण और अतुलनीय माना जाता है। उन्होंने तीन ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीते और हॉकी के क्षेत्र में अपने नाम को स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया। उनके अद्भुत कौशल और खेल प्रेम को लेकर उन्हें 'हॉकी विजार्ड' के नाम से जाना जाता है।
अशोक कुमार के इस बयान से एक बार फिर से ध्यानचंद को भारत रत्न से सम्मानित न किए जाने की बहस छिड़ी है। खेल प्रशासकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के महान खिलाड़ियों को देश का सर्वोच्च सम्मान दिया जाना चाहिए। ध्यानचंद के परिवार के इस आह्वान से सरकारी नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।