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निर्माता की चूक के लिए खरीदार को दंड नहीं दे सकते: सर्वोच्च न्यायालय
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आवास खरीदार निर्माता कंपनी की वित्तीय विफलता के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। यह फैसला नोएडा की लोटस बुलेवार्ड और लोटस पनाचे परियोजनाओं के मामले में आया है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने घোषणा की है कि आवास क्रेताओं को निर्माणकर्ता की डिफ़ॉल्ट स्थिति के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय नोएडा की लोटस बुलेवार्ड और लोटस पनाचे परियोजनाओं के खरीदारों की याचिका पर आया है, जिन्हें ग्रेनाइट गेट प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया था।
यह मामला एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न से संबंधित है जहां खरीदार अपनी अदालती लड़ाई लड़ रहे थे। दिल्ली की राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने जुलाई 2025 में एक आदेश पारित किया था, जिसे खरीदारों ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
शीर्ष अदालत के इस फैसले से संपत्ति खरीद क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित हुआ है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई निर्माता कंपनी अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहती है, तो इसका दोष निर्दोष खरीदारों पर नहीं डाला जा सकता। यह निर्णय उन हजारों भारतीय क्रेताओं के लिए राहत ला सकता है जो अधूरी परियोजनाओं के मामलों में फंसे हुए हैं।
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का रुख आवास क्षेत्र में उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में इसी तरह के विवादों में एक महत्वपूर्ण कानूनी पूर्वदृष्टांत बनेगा।