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कनाडा से लौटे भारतीय को मुंबई में अपनापन नहीं मिला, फिर से जाने की चाहत
विदेश में रहते हुए देशभूमि की कमी महसूस कर भारत लौटने वाला एक प्रवासी अब फिर से विदेश जाने के लिए बेताब है। मुंबई लौटने के बाद उसे शहर में वह अपनापन नहीं मिला जिसकी उसे उम्मीद थी।
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भारतीय प्रवासियों के अनुभवों की एक नई गाथा सामने आई है जहां एक युवक कनाडा से अपनी जड़ों की ओर लौटा था, लेकिन अब वह फिर से विदेश लौटने की इच्छा रख रहा है। इस व्यक्ति के अनुसार, विदेश में रहते हुए मातृभूमि की अत्यधिक कमी उसे भारत वापस आने के लिए प्रेरित करती रही।
हालांकि, मुंबई लौटने के बाद की बास्तविकता उसकी अपेक्षाओं से भिन्न निकली। शहर बदल चुका था और वह परिवेश जिसे वह याद रखता था, वह अब अस्तित्व में नहीं रहा। कई वर्षों की अनुपस्थिति के बाद सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर एक अजनबीपन की अनुभूति उसे घेरे रहती है।
ऐसे प्रवासियों का अनुभव दर्शाता है कि विदेश में रहने वाले भारतीयों के सामने एक द्वैध समस्या होती है। मातृभूमि की स्मृति उन्हें खींचती है, किंतु वापसी के बाद सांस्कृतिक परिवर्तन और बदली हुई परिस्थितियां उन्हें असंतुष्ट कर जाती हैं।
इस मामले ने वैश्विक भारतीय समुदाय के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है कि क्या प्रवासी सफलतापूर्वक अपनी मातृभूमि में पुनः समायोजन कर सकते हैं, अथवा दशकों की अनुपस्थिति के कारण हमेशा के लिए वे एक अस्थायी अवस्था में रहते हैं।