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9/11 के बाद रूस और पश्चिम के संबंधों में कैसे आया मोड़
आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में 9/11 के बाद रूस और पश्चिमी देश एकजुट हुए थे। लेकिन 2003 में परिस्थितियां बदल गईं।
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सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के तुरंत बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच सहयोग का एक नया दौर शुरू हुआ। अमेरिका में जुड़वां मीनारों के विनाश के बाद उभरी वैश्विक आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में मास्को ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवधि में दोनों पक्षों के बीच सुरक्षा संबंधी मामलों पर सहमति दिखाई दी।
हालांकि, यह सहयोग की अवधि अधिक लंबी नहीं रही। 2003 में इराक पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के मुद्दे पर रूस और पश्चिमी देशों के बीच मतभेद उजागर हुए। अमेरिका के नेतृत्व वाली सैन्य कार्रवाई को लेकर रूस की आपत्तियों ने दोनों पक्षों के बीच विश्वास को नुकसान पहुंचाया।
इराक युद्ध के बाद दोनों पक्षों के बीच सुरक्षा चिंताओं और भू-राजनीतिक हितों पर गहरी खाई बढ़ने लगी। अफगानिस्तान और काकेशस क्षेत्र में रणनीतिक प्रभाव को लेकर मतभेद और गहरे हुए। आतंकवाद विरोधी मोर्चे पर 9/11 के बाद बना अस्थायी गठबंधन धीरे-धीरे विखंडित होने लगा।
आने वाले वर्षों में रूस और पश्चिम के बीच संबंध तनाव की ओर बढ़ते गए। नाटो का विस्तार, यूक्रेन का भू-राजनीतिक स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे केंद्रीय विवाद के बिंदु बन गए। इस प्रकार 9/11 के बाद की एकता का दौर अधिक स्थायी साबित नहीं हुआ।