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पिट्सबर्ग के नल कारीगर ने बनाया एल्यूमिनियम वेधशाला, आइंस्टीन से मिलवाया
1930 में लियो स्कैनलॉन द्वारा स्थापित वैली व्यू वेधशाला ने सस्ती और नवीन तकनीक के माध्यम से खगोल विज्ञान में क्रांति लाई। इस वेधशाला की विशिष्ट एल्यूमिनियम डोम संरचना ने अल्बर्ट आइंस्टीन का ध्यान भी आकर्षित किया।
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पिट्सबर्ग के एक पारंपरिक नल कारीगर ने 1930 में एक ऐसी वेधशाला का निर्माण किया जो खगोल विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशा देने वाली साबित हुई। लियो स्कैनलॉन द्वारा स्थापित वैली व्यू वेधशाला अपनी अनूठी एल्यूमिनियम गुंबद संरचना के कारण शीघ्र ही देशभर के शौकीन खगोलविदों के बीच लोकप्रिय हो गई।
स्कैनलॉन के इस सस्ते और प्रभावी निर्माण दृष्टिकोण ने पारंपरिक वेधशाला निर्माण की महंगी प्रक्रियाओं को चुनौती दी। उनकी अभिनव तकनीक ने पूरे राष्ट्र में शौकिया विज्ञान को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1934 में, विश्वविख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने इस वेधशाला का भ्रमण किया और शौकिया विज्ञान की भावना की प्रशंसा की।
स्कैनलॉन और उनकी वेधशाला के योगदान को मान्यता देते हुए, खगोल विज्ञान समुदाय ने एक क्षुद्रग्रह को उनके नाम पर समर्पित किया। क्षुद्रग्रह 8131 को 'स्कैनलॉन' नाम दिया गया, जो वैली व्यू वेधशाला की दीर्घस्थायी विरासत और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में इसके महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकृति प्रदान करता है।