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मद्रास के आसमान में पंख लगे: विमानन का रोमांचक इतिहास
1910 में डी'एंजेलिस की पहली उड़ान से शुरू हुआ मद्रास का विमानन इतिहास। लंदन से मद्रास तक की रोमांचक यात्राओं से लेकर अलाप्पा चेट्टियार के जुपिटर एयरवेज तक, इस शहर के आसमान ने कई यादगार पल देखे हैं।
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मद्रास के आसमान में विमानन का युग 1910 में शुरू हुआ जब डी'एंजेलिस ने अपनी पहली उड़ान भरी। इस ऐतिहासिक क्षण ने इस दक्षिणी शहर को भारत के विमानन क्षेत्र के मानचित्र पर स्थापित किया। शहर के आसमान ने तब से लेकर अब तक विमानन के कई महत्वपूर्ण पड़ाव देखे हैं।
विमानन इतिहास में मद्रास की भूमिका और भी गौरवान्वित हुई जब एक दे-हेविलैंड डव विमान लंदन से 27 घंटे की यात्रा करके मद्रास पहुंचा। इस दुस्साहसिक उड़ान ने रिकॉर्ड स्थापित किए। विशेषकर रात में लैंडिंग की घटना स्मरणीय रही, जब पायलटों को इतना डर था कि वे पत्ते की तरह कांप रहे थे। यह घटना उस दौर की विमानन तकनीक और साहस की कहानी कहती है।
व्यावसायिक विमानन के क्षेत्र में भी मद्रास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एयर टैक्सी सेवाएं संचालित की गईं जो बर्मा तक जाती थीं। इसी अवधि में प्रभावशाली व्यापारी अलाप्पा चेट्टियार ने जुपिटर एयरवेज की स्थापना की, जो शहर की आर्थिक और तकनीकी प्रगति का प्रतीक बन गया।
इन विकासों ने मद्रास को भारत के प्रमुख विमानन केंद्रों में से एक के रूप में स्थापित किया। शहर के आसमान की ये विरासत आधुनिक भारतीय विमानन के विकास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहती है।