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पाकिस्तान में दिवाली: अल्पसंख्यक समुदाय की परंपरागत उत्सव की झलक
पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख समुदाय दिवाली मनाते हैं, लेकिन भारत की तुलना में वहां इस पर्व की अभिव्यक्ति भिन्न रूप में देखी जाती है। देश में रहे लोगों के अनुभवों से सामने आता है कि वहां दिवाली की परंपरा को कैसे संजोया जाता है।
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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू और सिख समुदाय अपनी परंपराओं के अनुसार दिवाली का त्योहार मनाते हैं। हालांकि भारत में इस पर्व के दौरान जहां सड़कों और बाजारों में रंगों और रोशनी का भरपूर प्रदर्शन होता है, वहीं पाकिस्तान में यह उत्सव अधिक निजी और सीमित दायरे तक रहता है।
देश में रहने वाले समुदायों के अनुसार, वहां दिवाली पर मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। परिवार इकट्ठा होकर मिठाई बांटते हैं और घरों को सजाते हैं। हालांकि, भारत की तुलना में पाकिस्तान में इस त्योहार का सार्वजनिक आयोजन सीमित रहता है।
अल्पसंख्यक समुदायों को इस पर्व को मनाने की आजादी होती है, लेकिन पाकिस्तान में हिंदू और सिख आबादी कम होने के कारण दिवाली का सामूहिक उत्साह भारत जितना व्यापक नहीं होता। फिर भी, पाकिस्तान में रहने वाले इन समुदायों के लिए दिवाली अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी रहती है।
देश के विभिन्न शहरों, विशेषकर करांची, लाहौर और हैदराबाद जैसे क्षेत्रों में हिंदू समुदाय अपनी परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ दिवाली मनाते हैं। समुदाय के सदस्यों के लिए यह पर्व अपनी सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखने और पीढ़ियों तक परंपराओं को आगे बढ़ाने का जरिया है।