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मेरीलैंड से भागे 5 हंसों की संतानें 40 साल में 4,000 तक पहुंचीं
1962 में मेरीलैंड की एक संपत्ति से पांच मूक हंस भाग निकले थे। चार दशक बाद उनकी संख्या चेसापीक खाड़ी क्षेत्र में लगभग 4,000 तक पहुंच गई है। ये आक्रामक प्रजाति पानी के पौधों को बड़ी मात्रा में खाती है और मूल पक्षियों को विस्थापित करने के लिए जिम्मेदार मानी जा रही है।
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चेसापीक खाड़ी क्षेत्र में एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न हुई है जब 1962 में मेरीलैंड के एक निजी एस्टेट से भागे पांच मूक हंसों की संतानें पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन गई हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इन आक्रामक प्रजाति के पक्षियों की संख्या अब लगभग 4,000 तक पहुंच गई है।
ये विदेशी हंस खाड़ी के अंडरवाटर घास के मैदानों को बड़े पैमाने पर नष्ट कर रहे हैं। प्रत्येक हंस प्रतिदिन बड़ी मात्रा में जलीय पौधों का सेवन करता है, जिससे खाड़ी की जलीय वनस्पति में तेजी से गिरावट आ रही है। यह समस्या पूरे क्षेत्र की जलीय खाद्य श्रृंखला को प्रभावित कर रही है।
वन्यजीव प्रबंधकों का मानना है कि ये आक्रामक हंस स्थानीय पक्षी प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से विस्थापित भी कर रहे हैं। खाड़ी की जैव विविधता पर इनके बढ़ते प्रभाव से संबंधित चिंताएं दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं। पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को इस स्थिति से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।