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भारत की दवाइयां सस्ती क्यों हैं, शोध से मिले महत्वपूर्ण सुराग
मधुमेह रोग विशेषज्ञों के एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत में महंगी दवाइयां किफायती कीमतों पर मिलने का कारण देश की वैश्विक दवा निर्यातक की भूमिका, पेटेंट कानून और जेनेरिक दवा उत्पादन है।
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भारत में मधुमेह की दवाइयों की कम कीमत का रहस्य एक विस्तृत शोध से उजागर हुआ है। डायबिटोलॉजिस्ट के एक समूह द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि देश की सशक्त फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री और विचारशील कानूनी ढांचे के कारण भारत के रोगियों को विश्व स्तरीय दवाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध हो पाती हैं।
शोध में उजागर हुआ है कि भारत के कानून 'पेटेंट एवरग्रीनिंग' को रोकते हैं। यह वह प्रक्रिया है जिसमें दवा निर्माताओं द्वारा मौजूदा दवाइयों में मामूली बदलाव कर पेटेंट की अवधि बढ़ाई जाती है। भारत के पेटेंट कानून ऐसी चालों को प्रतिबंधित करते हैं, जिससे जेनेरिक दवाएं शीघ्र बाजार में आ सकती हैं।
भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्माता और निर्यातक है। यह स्थिति देश को विभिन्न दवा निर्माताओं को प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में उतरने के लिए प्रेरित करती है। परिणामस्वरूप कीमतों में प्रतिस्पर्धा होती है और उपभोक्ताओं को सस्ती दवाएं मिलती हैं।
शोध विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह रणनीति विकासशील देशों में जीवन रक्षक दवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मधुमेह जैसे लाइलाज रोगों में नियमित दवा लेना जरूरी है और भारत की सस्ती दवाएं इसे संभव बना रही हैं।