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इजरायल में प्रधानमंत्री चुनाव: भारत से बिल्कुल अलग व्यवस्था
इजरायल की संसद में 120 सीटें हैं और यहां भारतीय चुनाव प्रणाली से पूरी तरह अलग तरीका अपनाया जाता है। जानिए कि इजरायल में प्रधानमंत्री का चयन किस प्रक्रिया के माध्यम से होता है।
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इजरायल में प्रधानमंत्री का चुनाव भारत की संसदीय प्रणाली से बिल्कुल भिन्न है। यहां सीधे क्षेत्रों के आधार पर टिकट वितरण नहीं होता है। इजरायल की संसद (कनेसेट) में कुल 120 सीटें हैं, जिन्हें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत वितरित किया जाता है।
इजरायल में राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव होते हैं, जहां मतदाता विभिन्न राजनीतिक दलों को वोट देते हैं, न कि किसी विशेष उम्मीदवार को। सभी दलों को उनके द्वारा प्राप्त मतों के अनुपात में सीटें मिलती हैं। इसके बाद राष्ट्रपति सबसे बड़े दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव देते हैं।
नई सरकार बनाने के लिए संसद में बहुमत आवश्यक है। आमतौर पर एक दल पूर्ण बहुमत नहीं पाता है, इसलिए गठबंधन सरकार बनाई जाती है। निर्वाचित प्रधानमंत्री को कनेसेट में अपनी सरकार के लिए समर्थन हासिल करना पड़ता है। यह प्रणाली भारतीय चुनाव व्यवस्था से एकदम अलग है, जहां क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और प्रत्यक्ष चुनाव मुख्य आधार हैं।
इजरायल की राजनीति में गठबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि बहुसंख्यक दल दुर्लभ हैं। इससे छोटे दलों को भी महत्वपूर्ण भूमिका मिलती है और वे सरकार गठन में अहम भूमिका निभाते हैं। यह व्यवस्था इजरायली राजनीति को गतिशील और बहुआयामी बनाती है।