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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: ब्रिटिश राज के विरुद्ध संघर्ष के बीच उदय
भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य सांस्कृतिक और धार्मिक पुनरुत्थान के माध्यम से एक 'हिंदू राष्ट्र' की स्थापना करना था। इस संगठन ने भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव डाला।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना 1925 में हुई थी, जब भारत ब्रिटिश शासन से मुक्ति के लिए संघर्षरत था। इस अवधि में, संगठन ने राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का लक्ष्य रखा। संघ की विचारधारा भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों के संरक्षण पर केंद्रित थी।
संघ के विचारकों का मानना था कि भारतीय समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटना चाहिए और एक सुसंगत राष्ट्रीय पहचान विकसित करनी चाहिए। इस दृष्टिकोण के अनुसार, हिंदू सभ्यता और संस्कृति भारतीय पहचान का केंद्रबिंदु था। संगठन ने युवाओं को संगठित करने और उन्हें राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया।
1925 से 1966 के बीच की अवधि में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। संगठन की गतिविधियाँ केवल सांस्कृतिक आंदोलन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वह राष्ट्रीय आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाता था। इस दौरान संघ की सदस्यता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और इसकी विचारधारा लाखों भारतीयों को प्रभावित करती रही।