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1959 में तमिल अभिनेता एम.आर. राधा ने प्रतिबंधित नाटक को अलग नाम से मंचित किया
मद्रास सरकार द्वारा प्रतिबंधित नाटक 'थूकु मेदै' को लेकर विवाद खड़ा हुआ जब प्रसिद्ध तमिल अभिनेता एम.आर. राधा ने इसी नाटक को अलग नाम 'कथल बली' के तहत प्रदर्शित करने का प्रयास किया।
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अप्रैल 1959 में मद्रास सरकार ने प्रसिद्ध तमिल अभिनेता एम.आर. राधा के नाटक 'थूकु मेदै' पर प्रतिबंध लगा दिया। इस कार्रवाई के बाद राधा ने एक अन्य नाटक 'कथल बली' की पटकथा मद्रास के पुलिस आयुक्त के पास जमा की और उसे प्रदर्शित करने के लिए अनुमति प्राप्त की।
हालांकि, जब पुलिस ने इस नाटक की विस्तृत समीक्षा की तो पाया कि यह प्रतिबंधित नाटक 'थूकु मेदै' के समान ही था। पुलिस ने इस धोखाधड़ी को लेकर एक मामला दर्ज किया।
यह घटना उस समय के सांस्कृतिक और राजनीतिक सेंसरशिप की कठोरता को दर्शाती है। राधा की यह कारगुजारी सरकारी प्रतिबंधों को चकमा देने का एक साहसिक प्रयास मानी गई।
तमिल रंगमंच के इतिहास में यह घटना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी नियंत्रण के बीच संघर्ष का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनी रही।