LSN News › India

Politics · India Bureau

एचपीवी वैक्सीन: एक खुराक या दो? विशेषज्ञों में मतभेद

मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीनेशन को लेकर स्वास्थ्य संस्थानों के बीच सिफारिशों में अलग-अलग मत उभरे हैं। इस विवाद का असर कैंसर रोकथाम के प्रयासों पर पड़ सकता है।

LSN India · 26 September 2026

एचपीवी वैक्सीन की खुराकों की संख्या को लेकर चिकित्सा जगत में महत्वपूर्ण मतभेद सामने आए हैं। संघीय स्वास्थ्य एजेंसियों और डॉक्टरों के संगठन इस बारे में अलग-अलग दिशानिर्देश दे रहे हैं कि किशोरों को कितनी खुराकें दी जानी चाहिए। यह असहमति टीकाकरण नीति को लेकर व्यापक भ्रम पैदा कर रही है।

इस विवाद की जड़ में वैज्ञानिक अनुसंधान और लागत-प्रभावशीलता संबंधी विचार निहित हैं। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि एक खुराक भी पर्याप्त सुरक्षा प्रदान कर सकती है, जबकि अन्य पूरी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त खुराकों पर जोर देते हैं। यह असहमति स्वास्थ्य नीति निर्माताओं के लिए चुनौती बन गई है।

एचपीवी से संबंधित कैंसर, विशेषकर गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम के लिए यह वैक्सीन महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत समेत दक्षिण एशिया में इस कैंसर का बोझ काफी है। इसलिए टीकाकरण को लेकर स्पष्ट और व्यावहारिक दिशानिर्देश जनस्वास्थ्य के लिए आवश्यक माने जा रहे हैं।

इस विवाद को सुलझाने के लिए अतिरिक्त शोध और अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि विभिन्न देशों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक सिफारिशें तैयार की जानी चाहिए ताकि प्रभावी टीकाकरण कार्यक्रम चलाए जा सकें।