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आय न होने का दावा करके पत्नी का भरण-पोषण टालना नहीं हो सकता: अलाहाबाद हाईकोर्ट
अलाहाबाद उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कमाने की क्षमता रखने वाला पति बेरोजगारी या व्यवसाय में नुकसान का हवाला देकर पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। न्यायालय के अनुसार, आय न होने का दावा करना वैध बहाना नहीं है।
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अलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में पतियों को यह संदेश दिया है कि वे आर्थिक कठिनाइयों का बहाना बनाकर अपनी पत्नियों का भरण-पोषण नहीं छोड़ सकते। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति कमाने की क्षमता रखता है, तो उसे इस दायित्व से मुक्ति नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट के निर्णय के अनुसार, बेरोजगारी, व्यवसाय में घाटा या आय में कमी का दावा करना किसी पति को भरण-पोषण के कानूनी दायित्व से मुक्त करने का पर्याप्त कारण नहीं है। न्यायालय ने माना है कि ऐसे दावों की गहन जांच की जानी चाहिए।
यह फैसला विवाहित महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय ने पति की आर्थिक क्षमता को परखने के लिए विभिन्न मानदंडों पर ध्यान देने की जरूरत बताई है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय उन पतियों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है जो अपनी आय को छिपाने या कम आंकने का प्रयास करते हैं। हिंदू विवाह अधिनियम और दंड संहिता के तहत पति पर पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने की कानूनी बाध्यता है।