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चीन-पाकिस्तान सहयोग से निपटने के लिए वायुसेना क्षमता बढ़ाएगी
भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सहयोग को ध्यान में रखते हुए वायुसेना अपनी योजना तैयार कर रही है। उन्होंने इस 'संयुक्त खतरे' का मुकाबला करने के लिए अपनी ताकत को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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भारतीय वायु सेना (IAF) के प्रमुख ने पश्चिम में पाकिस्तान और उत्तर में चीन से आने वाले समन्वित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत की रणनीतिक योजना में दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य एवं तकनीकी सहयोग को एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में देखा जा रहा है।
वायु सेना के शीर्ष अधिकारी के अनुसार, इस द्वैध चुनौती का सामना करने के लिए संगठन अपनी परिचालन क्षमता, तकनीकी विकास और कर्मी प्रशिक्षण में निवेश बढ़ा रहा है। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि वायु सेना की योजना निर्माण प्रक्रिया में यह संयुक्त खतरा एक केंद्रीय विचार है।
भारत के सुरक्षा विश्लेषकों के लिए चीन-पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग की बढ़ती गहराई एक दीर्घकालीन चिंता का विषय रहा है। दोनों देश ने बार-बार आंतरिक सैन्य अभ्यास, प्रौद्योगिकी साझाकरण और संयुक्त रक्षा परियोजनाओं पर सहयोग किया है।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने जोर दिया कि भारतीय वायु सेना अपने बेड़े का आधुनिकीकरण, रडार और निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करने और साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देने के माध्यम से इन उभरती चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार है।