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भारतीय वायु सेना को सालाना 36-40 नई लड़ाकू विमान की जरूरत: वायु सेनाध्यक्ष
भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन में आ रही गिरावट को रोकने के लिए प्रतिवर्ष 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है। वायु सेनाध्यक्ष ने देश की वायु शक्ति को मजबूत रखने के लिए इस आवश्यकता पर जोर दिया है।
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भारतीय वायु सेना (IAF) के वायु सेनाध्यक्ष ने कहा है कि रक्षा बलों की इस महत्वपूर्ण शाखा के स्क्वाड्रन में आ रही गिरावट को रोकने के लिए हर साल कम से कम 36 से 40 नए लड़ाकू विमान जोड़े जाने चाहिए। यह तादाद वायु सेना की परिचालन क्षमता को बनाए रखने और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
वायु सेना के पास वर्तमान में विमानों का एक सीमित बेड़ा है और पुरानी विमानों की सेवानिवृत्ति के कारण स्क्वाड्रन की संख्या में कमी आ रही है। सेनाध्यक्ष के अनुसार, सामरिक स्तर पर आत्मनिर्भर रहने के लिए नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का अधिग्रहण अत्यावश्यक है।
हाल के वर्षों में भारत ने अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए कई पहल की हैं, जिनमें राफेल विमान की खरीद और स्वदेशी तेजस विमान का विकास शामिल है। लेकिन वायु सेना के अधिकारियों का मानना है कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए और अधिक आधुनिक विमानों की आवश्यकता है।
वायु सेनाध्यक्ष की यह टिप्पणी रक्षा बजट और सैन्य आधुनिकीकरण की योजना के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार अगले दशक में वायु सेना की क्षमता को मजबूत करने पर विचार कर रही है।