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दिवाला प्रक्रिया के दुरुपयोग से बचाव के लिए नियामक का निर्देश
भारतीय दिवाला बोर्ड ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता के ढांचे के दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए पेशेवर प्रशासकों को कठोर अनुपालन के निर्देश दिए हैं। नियामक ने गैर-अनुपालनकारी प्रशासकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद यह कदम उठाया है।
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भारतीय दिवाला बोर्ड (आईबीबीआई) ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के कानूनी ढांचे के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए सभी नियुक्त प्रशासकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। नियामक के अनुसार, समस्त दिवाला पेशेवरों को इस प्रक्रिया के दौरान संदिग्ध या अनियमित गतिविधियों की पहचान करने के लिए तत्पर रहना होगा।
बोर्ड ने हाल ही में उन प्रशासकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की है जिन्होंने आईबीसी के नियमों का पालन नहीं किया। इस दृष्टिकोण से व्यक्तिगत ध्यान देने की आवश्यकता है और समस्त मामलों में उचित जांच-पड़ताल अनिवार्य बनाई गई है। नियामक का मानना है कि कठोर सतर्कता से ही इस महत्वपूर्ण संहिता की स्वच्छता को बनाए रखा जा सकता है।
आईबीबीआई के इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिवाला समाधान प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के दुरुपयोग से संरक्षित रखा जाए। पेशेवरों से अपेक्षा की जाती है कि वे संभावित कदाचार की स्थिति में तुरंत नियामक को सूचित करें। यह कदम आईबीसी की विश्वसनीयता और प्रभावकारिता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।