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आवास परियोजनाओं के संकट समाधान में तेजी लाने के लिए IBBI ने नियमों में संशोधन किया
भारतीय दिवाला बोर्ड (IBBI) ने संकटग्रस्त रियल एस्टेट परियोजनाओं के समाधान को तेजी देने के लिए नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। ये बदलाव परियोजना-आधारित व्यवहार, बेहतर प्रकटीकरण और क्रेताओं की भागीदारी को मजबूत करेंगे।
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भारतीय दिवाला बोर्ड (IBBI) ने संकटग्रस्त रियल एस्टेट परियोजनाओं के दिवाला समाधान प्रक्रिया से संबंधित नियमों में संशोधन को अधिसूचित किया है। यह कदम होम बायर्स और अन्य हितधारकों को प्रभावित करने वाली देरी और जटिलताओं को कम करने के लिए उठाया गया है।
IBBI के अनुसार, इन संशोधनों का उद्देश्य रियल एस्टेट परियोजनाओं का अधिक सूचित और व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था में परियोजना-आधारित उपचार, बढ़ी हुई पारदर्शिता, मजबूत होम बायर भागीदारी और विस्तृत लागत मूल्यांकन शामिल है। ये प्रावधान अधिक यथार्थवादी बोलियों को आकर्षित करने में मदद करेंगे।
भारतीय दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) का कार्यान्वयन करने वाली IBBI एक महत्वपूर्ण संस्था है। यह संहिता संकटग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान के लिए बाजार-आधारित और समय-सीमित तंत्र प्रदान करती है।
IBBI ने शनिवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि संशोधन पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाएंगे। साथ ही, दिवाला समाधान प्रक्रिया में होम बायर्स और अन्य हितधारकों के हितों को मजबूत किया जाएगा। यह कदम उन लाखों खरीदारों को राहत देगा जो वर्षों से अपनी परियोजनाओं के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।