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आईसीएआर-सीआईबीए की तकनीक से दूध मछली बाजार में आएगी नई जान
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान ने दूध मछली से महीन हड्डियों को निकालने की नई तकनीक विकसित की है। इस तकनीक से मछली उपभोक्ताओं के लिए अधिक स्वादिष्ट और आकर्षक बन जाएगी।
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आईसीएआर-सीआईबीए के निदेशक एम. कैलासम ने बताया कि दूध मछली में पाई जाने वाली बारीक अंतरांगीय हड्डियों को निकालने की इस नई तकनीक से मछली का उपभोग आम जनता के बीच अधिक लोकप्रिय हो सकेगा। उन्होंने कहा कि हड्डियों को हटाने से उपभोक्ताओं को खाने में आसानी होगी और वे दूध मछली का सेवन अधिक करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
दूध मछली भारत के तटीय क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण जलीय उत्पाद है। हालांकि, इसमें मौजूद महीन हड्डियां कई उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनती हैं। इस कारण से इसकी खपत सीमित रही है। आईसीएआर-सीआईबीए द्वारा विकसित नई तकनीक इस समस्या का समाधान प्रदान करती है।
इस तकनीक को अपनाने से मत्स्य पालकों और व्यापारियों के लिए भी नई संभावनाएं खुलेंगी। बेहतर गुणवत्ता की दूध मछली का उत्पादन करके वे बाजार में अपने उत्पाद की मांग बढ़ा सकेंगे। अनुसंधान संस्थान इस तकनीक को किसानों और मत्स्य उद्यमियों तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है।