Business · India Bureau
आईडीबीआई बैंक का स्वामित्व बदलने से जमाकर्ताओं को चिंता?
आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के बाद जमा राशि, ब्याज दरों और सेवाओं में बदलाव की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि केंद्रीय बैंक की निगरानी में सभी कानूनी सुरक्षा यथावत रहेंगी।
LSN India ·

आईडीबीआई बैंक के स्वामित्व परिवर्तन के बाद ग्राहकों के मन में अपनी जमा राशि, ब्याज दरों और बैंकिंग सेवाओं को लेकर सवालें उठ रहे हैं। बैंकिंग सेक्टर के विश्लेषकों का कहना है कि निजीकरण के बाद भी भारतीय रिजर्व बैंक की सख्त निगरानी में सभी खाताधारकों की जमा राशि सुरक्षित रहेगी।
भारतीय बैंकिंग विनियमन के तहत देश के किसी भी बैंक में सभी जमाकर्ताओं की राशि जमा बीमा और प्रत्यय निगम द्वारा संरक्षित है। वर्तमान में दस लाख रुपये तक की जमा राशि का बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बैंक के मालिकाना हक में बदलाव होने से यह सुरक्षा प्रभावित नहीं होगी।
आईडीबीआई बैंक के ग्राहकों के लिए सावधि जमा दरें और अन्य सेवाएं बाजार की प्रतिस्पर्धा के अनुसार तय की जाएंगी। बैंकिंग क्षेत्र के आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि निजी स्वामित्व में आने के बाद परिचालन दक्षता में सुधार से ग्राहकों को बेहतर सेवा मिल सकती है। तथापि, ब्याज दरों में किसी भी महत्वपूर्ण परिवर्तन के पहले बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों का पालन करना होगा।
रिजर्व बैंक की नियामक देखरेख में आईडीबीआई के सभी परिचालन न्यूनतम पूंजी आवश्यकता, तरलता मानदंड और अन्य सुरक्षा उपायों के अनुरूप रहेंगे। बैंक के ऋण और जमा संबंधी नीतियों में कोई भी परिवर्तन सेंट्रल बैंक की मंजूरी के बाद ही लागू हो सकता है।