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केरल में दशक बाद आईएफएस दंपति समेत सात पर यातना मामले में मुकदमा
मलयट्टूर हाथी शिकार मामले में दस साल बाद अदालत ने आईएफएस अधिकारियों समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमे की अनुमति दी है। अदालत ने माना कि चूंकि आरोपित कार्य सरकारी कर्तव्यों से जुड़े नहीं हैं, इसलिए अभियोजन के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी नहीं है।
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केरल की अदालत ने 2015 के मलयट्टूर हाथी शिकार मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इस मामले में एक आईएफएस दंपति सहित सात व्यक्तियों पर यातना और अन्य गंभीर आरोपों में मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई है। मामले में अभियुक्त वर्षों से अदालत में जा रहे थे क्योंकि वन विभाग ने सरकारी अधिकारियों को अभियोजित करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था।
अदालत ने इस मामले में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए माना कि चूंकि आरोपित व्यक्तियों द्वारा किए गए कार्यों का कोई उचित संबंध उनके सरकारी कर्तव्यों के साथ नहीं है, इसलिए वन विभाग की अनुमति अनिवार्य नहीं है। यह निर्णय कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें अदालत ने स्पष्ट किया है कि अधिकारियों द्वारा की गई गैर-कानूनी कार्रवाई के लिए सरकारी संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
मलयट्टूर में 2015 में हुई घटना को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। अभियुक्तों के विरुद्ध कथित रूप से हिरासत में यातना और अन्य गंभीर कार्यों के आरोप लगाए गए थे। अदालत के इस निर्णय से मामले में अब आगे की कार्रवाई तेजी से हो सकेगी।